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    Monday, 16 October 2017

    इस गांव की महिलाओं ने छेड़ा आंदोलन, टॉयलेट बिना ससुराल में नहीं मनाएंगी दिवाली

    शिक्षानगरी कोटा में इस साल दिवाली बड़ा संदेश भी साथ लेकर आई है. जी हां, उम्मेदगंज गांव की महिलाएं ससुराल में शौचालय नहीं होने के चलते ससुराल की जगह मायके में दिवाली मनाएगी.

    शौचालय नहीं होने से तंग महिलाओं ने सुसराल वालों के खिलाफ आंदोलन का शंखनाद कर दिया. आंदोलन है कि पहले घर मे शौचालय बनवाओ इसके बाद ही वो ससुराल में दिवाली का पर्व मनाएंगी, नहीं तो गांव की बहुएं इस बार अपने-अपने मायके में त्योहार मनाएंगी.

    गांव में शौचालय के लिए अब गांव की बहु मधू के साथ कई महिलाओं ने अपने सुसराल वालों के खिलाफ आंदोलन का आगाज कर दिया है. बहुएं एकजुट होकर खुले में शौच के खिलाफ अपनी आवाज इस अंदाज में बुलंद कर रही हैं कि अब खुले में शौच से मुक्ति चाहिए और इस मुक्ति के लिए उन्होंने अपने सुसराल वालों पर दबाव बनाया है. उनका कहना है कि अब शौचालय जल्द नहीं बनवाए तो दिवाली वो अपने मायके में जाकर मनाएंगी क्योंकि उनके मायके में शौचालय मौजूद है.

    महिलाओं का कहना था कि शौचालय नहीं होने से उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. अब बेटियां भी बड़ी हो गईं हैं, ऐसे में निजता की परेशानी के साथ-साथ असुरक्षा भी डराती रहती है, लेकिन कई बार मिन्नतें करने के बाद भी हालात नहीं सुधर रहे हैं, ऐसे में अब सुसराल वालों के खिलाफ यह भावनात्मक खिलाफत इस परेशानी से निजात दिलवा दे ऐसी उम्मीद हम कर रहे हैं.

    ससुराल पक्ष के लोग अब बहुओं के इस आंदोलन के बाद अजीब सी कमशमश में हैं. ऐसा नहीं है कि गांव में सरकार का खुले में शौच मुक्ति अभियान नहीं पहुचा है, लेकिन उसकी धीमी रफ्तार ने इस साल की दिवाली पर परिवार वालों को घर में शौचालय जल्द बनवाने को मजबूर कर दिया है.

    गांव के पुरूष कहते हैं कि गांव की महिलाओं ने दिवाली के मौके पर परिवारों के खिलाफ जो आंदोलन छेड़ा है वो फिलहाल परेशान करने वाला है, लेकिन हम इनकी परेशानियों को जानने के बाद भी अबतक निजात नहीं दिलवा पाए, उम्मीद है अब जल्द ही घरों में शौचालय भी बन जाएंगे.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान का ही यह असर है कि गांव की महिलाओं ने अब सालों से चली आ रही इस परेशानी के खिलाफ आवाज बुलंद की है, लेकिन उम्मेदगंज गांव में जो शहरी क्षेत्र में शामिल होने के बावजूद अबतक ओडीएफ होने का इंतजार कर रहा है, जबकि कोटा जिले की कुल 155 ग्राम पंचायतों में से अस्सी फीसदी ग्राम पंचायतें ओडीएफ घोषित हो चुकी हैं.
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